इस देश में एक सवाल एक बहस छिड़ी हुई है कि न्यूक्लियर वॉर होगा तो क्या होगा?
अगर परमाणु जंग छिड़ी तो क्या होगा? हमारे इस वक्त जो दुनिया में यूनाइटेड नेशन के हिसाब से संयुक्त राष्ट्र के हिसाब से दुनिया भर में 193 देश हैं। ये 193 इसलिए हैं क्योंकि ये सभी यूनाइटेड नेशन के मेंबर
हैं। लेकिन 12 देश ऐसे हैं जो यूनाइटेड नेशन के मेंबर नहीं है। तो अगर उन 12 देशों को भी इन 193 में मिला दें तो पूरी दुनिया में 205 देश हैं। अब इन 205 देशों में कुल सात अरब इंसान रहते हैं।
और यह जो सात अरब इंसान रहते हैं जो हमारी पूरी दुनिया है ये 51 करोड़ वर्ग किलोमीटर में ये दुनिया फैली हुई है। लेकिन इस 51 करोड़ वर्ग किलोमीटर में से 71% जो हिस्सा है इस दुनिया का वो पानी है। समंदर है। यानी सिर्फ बाकी के 29% जो है वह धरती है। तो इस हिसाब से अगर हम देखें तो 36 करोड़ वर्ग किलोमीटर पानी में है और बाकी
के बचे 51 में से 15 करोड़ धरती है और उस 15 करोड़ वर्ग किलोमीटर के दायरे में सात अरब इंसान बसते हैं। ये तो हो गया लेखाजोखा इस दुनिया का। अब ये
कहते हैं कि अगर न्यूक्लियर वॉर छिड़ी तो इस दुनिया का क्या होगा?
यह पूरी दुनिया जो 51 करोड़ वर्ग किलोमीटर में फैली है। सात अरब इंसान है। 205 देश है। इनका क्या होगा? कितने ऐसे न्यूक्लियर बम होंगे जो उनके खात्मे के इनकी बर्बादी के लिए काफी है। तो इसके ऊपर भी एक रिपोर्ट है। वो रिपोर्ट यह है कि जो पूरी दुनिया है और इस दुनिया में जितने इंसान हैं इनको कितने बम मार सकती है। इस दुनिया को तबाह करने के लिए कितने न्यूक्लियर बम चाहिए?
कैसे यह दुनिया तबाह होगी? कैसे सात अरब इंसान मारे जाएंगे? लेकिन उससे पहले इस अंजाम तक पहुंचे। ये कहानी आप समझे। जरूरी है ये जानना कि आखिर
ये न्यूक्लियर बम नाम की आफत जिससे दुनिया को बार-बार डराया जाता है। ये शुरुआत कहां से हुई?
इसकी होड़ कैसे शुरू हुई? क्यों दुनिया इसी दुनिया के खात्मे के लिए इस तरह के बम बना रही है। अपने ही जैसे इंसानों को मारने के लिए बम बना रही है। तो असल में न्यूक्लियर बम बनाने की जो होड़ शुरू हुई वो सेकंड वर्ल्ड वॉर के दौरान हुई। जब दूसरा विश्व युद्ध लड़ा जा रहा था तब
दुनिया का हर देश जंग के मैदान में तब्दील हो चुका था। लगभग लड़ाई के लिए जो हथियार थे सभी के पास एक जैसे कुछ बेहतर कुछ कमतर और उसी सेकंड वर्ल्ड वॉर के दौरान कई देशों ने यह सोचा कि काश हमारे पास कुछ ऐसा हथियार हो जो बाकी देशों के पास ना हो ताकि उन हथियारों के बल पर हम उन देशों को हराएं और दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश बन जाए।
सेकंड वर्ल्ड वॉर में ये पहली बार सामने आई सोच। अब इस सोच पर दुनिया ने काम करना शुरू किया कि सबसे खतरनाक हथियार क्या होगा? कैसे बनाए? तब तक थोड़ा साइंस भी तरक्की कर चुका था।
आज के मुकाबले तो नहीं लेकिन उस वक्त के हिसाब से बहुत तब उसी पर अलग-अलग देश काम करने लगे कि सबसे जानलेवा हथियार कैसे बनाए जो बाकी देशों पर हमको हुकूमत करने का मौका दे।
अब जब इस पर कोशिश शुरू हुई तो बहुत देशों ने कोशिश की लेकिन कामयाबी मिली जो पहला देश था वो था अमेरिका। 1945। अमेरिका ने पहली बार न्यूक्लियर टेस्ट किया और वो एक न्यूक्लियर संपन्न देश बना, और इस टेस्ट के बाद उसने कहा कि इस बम की ताकत या बर्बादी या इसकी आफत क्या है? इसको परखते हैं। तो परखने के लिए इस न्यूक्लियर बम को बनाने के कुछ ही दिन बाद
उसने जापान के हिरोशिमा और नागासाकी दो शहरों पर तीन दिन के अंदर-अंदर इस बम को गिराया, और इस बम की तबाही का आलम यह था कि आज करीब 80 साल हो गए। आज भी इन दो शहरों में इसका असर साफ देखा जा सकता है। तो 1945 वह साल था जब पहली बार न्यूक्लियर बम पैदा हुआ और अमेरिका पहला देश था।
अब जब अमेरिका ने न्यूक्लियर बम बनाया और नागासाकी हिरोशिमा की तबाही दुनिया को दिखाई तब दुनिया घबरा गई। लगा अमेरिका के पास तो है लेकिन हम लोगों के पास नहीं हैं, अगर कल को कोई और जंग हो थर्ड वर्ल्ड वॉर हो तो क्या होगा? अमेरिका तो जीत जाएगा। तो अब हर देश ने कहा कि अगर अमेरिका बना सकता है तो हम भी बनाएंगे।
इसके बाद अब सारे देश फिर से लग गए। लेकिन दूसरा जो देश बना जिसने इसमें कामयाबी हासिल की अमेरिका के बाद 1945 के बाद चार साल तक काम चला और चार साल के बाद 1949 में सोवियत संघ आज के रूस उसने, वो दूसरा देश था जिसने न्यूक्लियर टेस्ट किया कामयाबी के साथ सक्सेसफुल और उसने न्यूक्लियर बम बनाया। तो अमेरिका के बाद दूसरा देश जो बना न्यूक्लियर पावर वो रूस था।
अब रूस के बाद फिर होड़ मचनी शुरू हुई। अमेरिका और रूस दो अब देश इनके पास बम न्यूक्लियर बाकी देश काम पे लगे हुए थे। तभी अचानक रूस के तीन साल के बाद 1952 में खबर आई कि ब्रिटेन ने भी न्यूक्लियर टेस्ट कर लिया। अब ब्रिटेन के पास भी न्यूक्लियर बम और इस तरीके से ब्रिटेन न्यूक्लियर पावर बनने वाला दुनिया का तीसरा देश बना।
अब ब्रिटेन में बम बना लिया था। करीब आठ साल बीते। आठ साल के बाद 1960 में अब फ्रांस ने अचानक एक दिन टेस्ट किया और पता चला कि सक्सेसफुल टेस्ट था न्यूक्लियर का। और इस तरीके से अब अमेरिका, रूस और ब्रिटेन के बाद फ्रांस चौथा देश बना जिसने न्यूक्लियर बम बनाया। बाकी देशों की कोशिश अब भी जारी थी। सब लगे हुए थे। होड़ मचा हुआ था। अब इन सारे देशों ने जब बना लिया तो उस वक्त भी चीन एक ताकतवर देश था।
उसे लगा कि अमेरिका ने भी बना लिया, रशिया ने भी बना लिया, ब्रिटेन ने भी बना लिया। इसके अलावा फ्रांस ने भी बना लिया। और आखिरकार चीन की भी मेहनत रंग लाई। और फिर चीन ने एक दिन न्यूक्लियर टेस्ट किया। और इस न्यूक्लियर टेस्ट 1964 यानी कि फ्रांस के चार साल के बाद 64 में चीन भी एक न्यूक्लियर पावर कंट्री बन गया। और इस तरीके से चीन पांचवा देश था जो न्यूक्लियर पावर कंट्री था। अब चीन के बाद अब भी होड़ मची हुई थी। इसी दौरान में खबर आई इजराइल की जबकि एक नया देश था 48 में आजाद हुआ। हम 47 में
हुए थे तो पता चला कि उस वक्त सुगबुगाहट आई थी कि 1967 में ही इजराइल ने न्यूक्लियर टेस्ट कर लिया और इजराइल एक न्यूक्लियर संपन्न देश बन गया। लेकिन इजराइल ने कभी इसका खुलासा नहीं किया कि हमने न्यूक्लियर टेस्ट किया। हमने न्यूक्लियर बम बना लिया। जबकि वो 67 में बना चुका था। ऑफिशियली इसका जो पता चला दुनिया को मतलब जिस पर मोहर लगी 1986 में लगी कि इजराइल भी एक न्यूक्लियर पावर कंट्री है और इस तरीके से इजराइल इस दुनिया का छठा देश बना जिसके पास न्यूक्लियर बम थे।
अब इन सारे देशों ने बना लिया। इधर चीन ने बना लिया। पाकिस्तान हमारा पड़ोसी। वैसे ही उसको हमारा हमेशा खतरा रहता है क्योंकि जब तक वो परेशान करता रहता है 71 का वॉर हुआ पाकिस्तान के दो टुकड़े हुए अब इंडिया को लगा था कि पाकिस्तान भी तिल मिलाएगा कुछ करेगा तो आखिरकार इंडिया ने भी अब सीरियसली न्यूक्लियर बम बनाने की कोशिश शुरू कर दी और यह कोशिश चलती रही और आखिरकार 1974 में ऑपरेशन स्माइलिंग बुद्धा के तहत एक रोज अचानक इंडिया ने भी न्यूक्लियर टेस्ट किया और इस तरीके से इंडिया दुनिया का सातवा देश बना जो न्यूक्लियर पावर था, जिसके पास न्यूक्लियर बम थे। सातवां कंट्री इंडिया था।
सबसे दिलचस्प इन सारे न्यूक्लियर वेपन कंट्री में एक कंट्री जो गिनती में आठवां था। अब गिनती में कहीं नहीं है। यह वह देश है जिसने न्यूक्लियर टेस्ट किया कामयाबी से न्यूक्लियर बम बनाया और फिर एक दिन सोचा कि नहीं ये दुनिया के लिए ठीक नहीं है। ये बर्बादी है। ये तबाही है। इसलिए हम इस न्यूक्लियर बम की होड़ में नहीं रहेंगे।
उसने बम बनाया टेस्ट किया और फिर एक रोज खुद ही उसने सारे न्यूक्लियर बमों को डिस्मेंटल कर दिया। बर्बाद कर दिया और कहा हम आज के बाद कभी न्यूक्लियर बम नहीं बनाएंगे। हम न्यूक्लियर होड़ की तरफ नहीं जाएंगे। और यह दुनिया का इकलौता देश था जो बम बनाने वाला आठवां देश था।
उसका नाम है साउथ अफ्रीका। साउथ अफ्रीका ने इंडिया के बाद टेस्ट किया। कामयाबी के साथ बम भी बना लिया। 1977 में इंडिया ने बनाया था 74 में। लेकिन फिर उसे ख्याल आया कि नहीं यह ठीक नहीं है और साउथ अफ्रीका ने अपने सारे न्यूक्लियर बम को बर्बाद किए और उसने तय किया कि अब वो दोबारा कभी नहीं बनाएगा और आज भी साउथ अफ्रीका अपने इस स्टैंड पर कायम है तो गिनती के हिसाब से न्यूक्लियर बम बनाने वाला साउथ अफ्रीका आठवां कंट्री था लेकिन उसने इससे अलग कर लिया खुद को इसलिए अब गिनती में नहीं है। साउथ अफ्रीका
के बाद जो नवा कंट्री था जिसने परमाणु बम बनाया वह था पाकिस्तान। जब इंडिया ने 1974 में टेस्ट कर लिया तब जुल्फिकार अली भुट्टो ने कहा था कि हम हजार साल तक घास की रोटी खाएंगे लेकिन बम जरूर बनाएंगे ताकि इंडिया के बराबर खड़े हो सके। और हालांकि उन्हें 24 साल लगे। 74 से उन्होंने शुरू किया। 98 में उन्होंने टेस्ट किया और 1998 में पाकिस्तान मई के महीने में यही मई का महीना जो अभी चल रहा है इस दुनिया का नवा देश बना जिसके पास परमाणु बम है। अब इस कड़ी में जो आखिरी और दसवां जो देश बना वो था साउथ नॉर्थ कोरिया।
जितने भी देश हैं 2006 में पहली बार न्यूक्लियर टेस्ट किया कामयाबी के साथ और न्यूक्लियर संपन्न देश बन गया। तो इस तरीके से गिनती में जो लास्ट न्यूक्लियर वेपन कंट्री है वो है नॉर्थ कोरिया और गिनती के हिसाब से यह 10 है लेकिन कि साउथ अफ्रीका हट गया इसलिए अब सिर्फ नौ देश हैं जिनके पास परमाणु बम है।
तो यह रहे वो नौ देश
अब इन नौ देशों के पास कितने परमाणु बम है?
तो बुलेटिन ऑफ एटॉमिक साइंटिस्ट की एक रिपोर्ट अभी लेटेस्ट सबसे ताजा जो रिपोर्ट आई उसके हिसाब से इन नौ देशों के पास जो बम है उनकी तादाद है, 1241 न्यूक्लियर वॉर हेड यानी न्यूक्लियर बम न्यूक्लियर हथियार और इन 1241 न्यूक्लियर हेड में से सबसे ज्यादा पहले नंबर पर जिसके बाद सबसे ज्यादा बम है वो है रूस पुतिन का देश इनके पास 5500 परमाणु बम है।
नंबर 2 पर अमेरिका है जो सबसे पहला परमाणु देश था अमेरिका के पास 544 बम हैं,
तीसरा देश है जिसके पास सबसे ज्यादा परमाणु बम है चीन जिसके पास है 500 बम हैं,
चौथा है फ्रांस 290 बम हैं,
पांचवा है ब्रिटेन 225 बम हैं,
छठा है भारत 172 वॉर हेड परमाणु बम हैं,
सातवां है पाकिस्तान 170 बम है
आठवां है इजराइल इसके पास 90 परमाणु बम है
और नॉर्थ कोरिया के पास 50 है
तो इन नौ कंट्री के पास इस वक्त 1241 परमाणु बम है टोटल, अब जो शुरू में मैंने कहा था कि सात अरब की यह दुनिया 51000 वर्ग किलोमीटर के दायरे में फैली यह दुनिया न्यूक्लियर वॉर होगा तो ये दुनिया खत्म सारे इंसान मारे जाएंगे जो बार-बार डराया जाता है इसकी हकीकत और असलियत क्या है तो जैसा कि आपको बताया मैंने कि नौ देशों के पास 1241 न्यूक्लियर बम है,
इस दुनिया में सात अरब लोग हैं। अगर इन सात अरब इंसानों की जान लेनी है न्यूक्लियर बम से तो कहते हैं कि 30 से 40 टन के 500 न्यूक्लियर बम यानी 500 न्यूक्लियर बम जिनका वजन 30 से 40 किलोग्राम टन हो सात अरब इंसान की जान लेने के लिए काफी है।
500 और जबकि इस वक्त नौ देशों के पास टोटल बम कितने हैं? 1241 उस हिसाब से देखें तो इतने ज्यादा बम है कि सात अरब क्या करीब 100 अरब इंसानों की जान ले ले इतने बारूद पर इस वक्त दुनिया बैठी है। ये तो हो गई इंसान की जान लेने की बात। अब अगर पूरी धरती जो 15,000 वर्ग किलोमीटर में फैली है
क्योंकि बाकी सब समंदर है तो इस धरती को अगर खत्म करना हो तो इसके लिए कितने बम चाहिए परमाणु बम इंसान के लिए तो 500 बम काफी है पर धरती को ही पूरी तरह से नेस्तो नाबूद मतलब दुनिया खत्म करनी है तो कहते हैं कि इस 15000 वर्ग किलोमीटर की जो धरती है सिर्फ पानी नहीं उसको उसको बर्बाद करने के लिए कुल 12 लाख 8,000 न्यूक्लियर बम चाहिए। 12,8,000 बम यानी अभी धरती को मिटाने के लिए बम कम है। इंसानों को मारने के लिए जरूरत से ज्यादा है।
पर धरती को बर्बाद करने के लिए कम है। क्योंकि 1241 टोटल बम है और धरती का नाश के लिए
12,8,000 बम चाहिए। पर जिस तरीके से यह चल रहा है पता नहीं आगे क्या होगा। तो यह तो रहे वो नौ देश जिनके पास 1241 बम है। लेकिन आपको क्या लगता है सिर्फ नौ देश हैं। आज भी अभी भी इस वक्त दुनिया के कई ऐसे देश हैं जो न्यूक्लियर पावर बनने के लिए बेताब है और गुपचुप तरीके से काम कर रहे हैं।
अब ऐसे खास देश जो बहुत करीब है जो पहुंच सकते हैं। इनकी भी एक लिस्ट आई है। यह कौन-कौन से देश हैं जो आगे चलकर न्यूक्लियर पावर बन सकते हैं? अर्जेंटीना, ब्राजील, स्वीडन, लीबिया, रोमानिया, इजिप्ट, ताइवान, अल्जीरिया, जापान, सीरिया, और इराक।
ये वो देश हैं जो न्यूक्लियर पावर बनने की पूरी कोशिश में लगे हुए हैं। चोरी छुपे। जैसे भी कुछ न्यूक्लियर पावर कंट्री जो है इनकी मदद भी कर रहे हैं। लेकिन एक रिपोर्ट के हिसाब से यह जो इतने देश हैं अगर इनमें से तीन ऐसे देश हैं जो न्यूक्लियर पावर बनने के सबसे करीब हैं। मतलब कोशिश तो यह सारे देश कर रहे हैं लेकिन इनमें से तीन ऐसे देश हैं जो परमाणु बम बनाने की दहलीज पर खड़े हैं।
और ये तीन देश हैं ईरान, अर्जेंटीना और ब्राजील। देखिए ब्राजील और अर्जेंटीना दोनों फुटबॉल के लिए जाने जाते हैं। वह भी न्यूक्लियर
बम बनाने की दहलीज पर है। और ईरान के बारे में तो आपको पता ही है कि लगातार ये खबरें आती रहती है कि ईरान ने न्यूक्लियर बम बना लिया है। बनाने के करीब है। तो ये तीन वो देश हैं जो सबसे करीब है। यानी नौ देश अभी ऑलरेडी बने हुए हैं। तो शायद ये 9 तीन 12 हो जाए। इसके अलावा कहते हैं कि एक देश जिसके पास न्यूक्लियर की पूरी टेक्निक है।
कभी भी बना सकता है। आसानी से बना सकता है वो है जापान। लेकिन जापान न्यूक्लियर बनाने के फेवर में नहीं है। शायद नागासाकी हिरोशिमा की बर्बादी उसने देखी। तो इसीलिए उनकी पॉलिसी है कि हम न्यूक्लियर बम नहीं
बनाएंगे। लेकिन कहते हैं कि उनके पास पूरी टेक्निक है और उसमें अमेरिका भी उनकी मदद कर रहा है। लेकिन उनकी अपनी पॉलिसी की वजह से वो नहीं कर रहे। अब सवाल होगा कि इतने सारे बम, ये दुनिया की बर्बादी ये सारी चीजें तो आपने देख ली। परमाणु लड़ाई होगी तो,
सबसे खतरनाक हथियार कहां पे है?
क्या है? जब कोल्ड वॉर चल रहा था 1945 जब सेकंड वॉर खत्म हुआ उसके बाद से लेकर 1991 तक ये अमेरिका और रूस के बीच जो कोल्ड वॉर शुरू हुआ था। ये वॉर तो नाम दिया गया कोल्ड वॉर शीत युद्ध पर इसमें सीधी लड़ाई कभी नहीं हुई। इसमें से सैन्य लड़ाई कभी नहीं हुई। बस एक तरह की आर्थिक बाकी सारी चीजों की लड़ाई थी।
वैचारिक सीधी जंग नहीं हुई। लेकिन यह लंबी चली और इसी दौरान में यह दोनों देश सुपर पावर बनने की भी तरफ कोशिश कर रहे थे। इसी दौरान में रूस ने सोचा कि अमेरिका के पास इतने परमाणु बम है वो दुनिया में बनाने वाला पहला देश है। अगर उसने कभी रूस पर हमला कर दिया परमाणु बम से तो रूस के पास कितना टाइम होगा इन बमों से खुद को बचाने और पलटवार करने के लिए तो बहुत सारी चीजें उसने सोचनी शुरू की तो पता चला कि अमेरिका ने अलग-अलग जगहों पर बहुत सारे बेस बना रखे हैं। अमेरिका से अगर वह परमाणु बम छोड़ता है तो शायद 10 15 मिनट
लगेगा जो मिसाइल लेकिन नाटो के देश हैं आसपास में और भी देश हैं वहां पे भी उन्होंने अपना बेस बना रखा है, अगर वहां से रशिया पर मिसाइल गिराएंगे तो मुश्किल से दो चार मिनट और अब जिस तरीके के जो मिसाइल है स्पीड के हिसाब से सुपर सोनिक या हाइपरसोनिक मिसाइल इसकी जो स्पीड है पांच से सात से 10 हॉर्स जो स्पीड होती उससे पांच से 10 गुना तेजी से स्पीड यह उन मिसाइल की स्पीड है जो कैरियर का काम करेंगे,
परमाणु बम को ले जाने के लिए एक जगह से दूसरी जगह निशाना साधने के लिए तो जब आवास की गति से 10 गुने मिसाइल की
रफ्तार पर बैठकर परमाणु बम को कहीं भेजा जाए और वो गिरे तो उस देश के पास संभलने और फिर कमांड देने या एक्शन लेने के लिए मुश्किल से बहुत मुश्किल से दो से तीन मिनट का वक्त होगा। जैसे अभी अमेरिका अगर सपोज मान लो 50 परमाणु बम रशिया पर गिराता है तो दो से तीन मिनट के अंदर रशिया के अलग-अलग शहरों पर ये बम गिर जाएगा और अब आप सोचिए कि दो से तीन मिनट में आप क्या रिस्पांस करोगे कैसे कमांड दोगे क्या करोगे ये बात रशिया ने आज से 50 60 साल पहले सोच लिया था कि ऐसी सूरत में तो फिर हमें संभलने का भी मौका नहीं मिलेगा।
हमारे पास परमाणु बम है लेकिन हम उसको कमांड कैसे देंगे हर देश परमाणु बम को बड़ी हिफाजत से रखता है मैंने जैसे कहा था हर पुरजों को अलग-अलग रखा जाता है ताकि कभी गलती से भी कोई उसको ब्लास्ट ना कर दे।
तब रशिया ने एक टेक्नोलॉजी इजात की और उसका नाम रखा डेड हैंड। डेड हैंड यानी मुर्दा हाथ। ऑटोमेटिक न्यूक्लियर वेपन मिसाइल। रशिया के गुप्त जगहों पर बंकर में उसके सारे परमाणु बम रखे हुए हैं। अब न्यूक्लियर बम का इस्तेमाल करने उसे छोड़ने के लिए कोड और फिर उसकी कमांड चाहिए होती है। रशिया ने ये सोचा कि अगर मान लो अचानक उसके देश पर हमला हो जाता है
पूरा मॉस्को खत्म। मान लीजिए रशिया की पूरी सैनिक, पूरी आर्मी सारी मारी गई तो फिर न्यूक्लियर बम को कमांड कौन देगा? उसे छोड़ेगा कौन? हम तो तबाह हो जाएंगे। तब उसने बनाया डेड हैंड मुर्दा हाथ। यह वो टेक्नोलॉजी है कि जिसके तहत जहां पर यह सारे उनके न्यूक्लियर वेपन रखे हुए हैं। अगर न्यूक्लियर हमला होता उनके देश पर तो सिर्फ हवा के रेडिएशन, टेंपरेचर और कुछ बाकी और चीजों से यह सारे वेपन अपने आप पकड़ लेंगे कि हमला हो चुका और शायद बचने की कोई गुंजाइश किसी की है नहीं।
तो यह ऑटोमेटिक कमांड ले लेंगे और जिस देश ने हमला किया है उस देश पर यह पलटवार करेंगे। यानी एक साथ और ये जो अलग-अलग कहीं पे भी रखे हो 5500 सपोज अभी अगर न्यूक्लियर वॉर हेड है रशिया के पास ये एक साथ निकलेंगे और अगर जिस देश ने भी हमला किया उस देश पर जाकर बरसेंगे। यानी अगर रूस पर हमला होता है सारे सैनिक उसके मुर्दा मारे गए फिर भी यह मुर्दा हाथ अपने दुश्मन को बख्शेगा नहीं, मौत के बाद भी वो दुश्मन से बदला लेगा इसके लिए सिर्फ तीन लोगों की जरूरत पड़ेगी और प्लानिंग ये है कि तीन लोग सेना या आर्मी के बहुत बड़े कोई लोग नहीं होंगे क्योंकि जंग की सूरत में तो वो सब भागे होंगे ये तीन बड़े गुप्त लोग हैं और तीनों
अलग हैं। कमांड वो खुद लेगा डेड हैंड। बस इन्हें एक छोटा सा काम करना होगा और यह सारे जो तीन लोग होते हैं इनको हमेशा बंकर में रखा जाता है ताकि कोई परमाणु हमला हो तो ये तीन लोग उस परमाणु हमले से भी महफूज़ रहें, सुरक्षित रहें और फिर उस सिचुएशन में वो काम करें कि बस उन्हें एक कोड देना है और ये सारे के सारे परमाणु बम उस देश पर जाकर गिरेंगे।
यानी खुद मरेंगे, सामने वाले को भी मार डालेंगे। इसीलिए इसका नाम रखा है डेड हैंड। और अब कहते हैं कि अमेरिका से लेकर बाकी देश भी इसी ऑटोमेटिक न्यूक्लियर वेपन मिसाइल डेड हैंड
के सारे फार्मूले और उसे हासिल करने की कोशिश में है। क्योंकि जिस तेजी से अब कैरियर यानी के न्यूक्लियर वेपन को ले जाने वाले जो मिसाइल है उसकी स्पीड बढ़ रही है। आने वाले वक्त में अगर कोई देश किसी के ऊपर मिसाइल से हमला न्यूक्लियर से हमला करता है मुश्किल से एक दो तीन मिनट इससे ज्यादा उसके पास वक्त होगा नहीं और इन एक दो तीन मिनट में आप कुछ कर नहीं पाओगे इसीलिए एक ऐसी टेक्नोलॉजी होनी चाहिए कि आप कुछ ना करो वो खुद कर ले मुर्दा हाथ तो ये थी आज की कहानी पता नहीं इस न्यूक्लियर वॉर में ये दुनिया और खूबसूरत
दुनिया को लोग क्यों बदसूरत बनाने पर तुले हुए हैं।
Conclusion
दुआ यही है कि ऐसा कभी कुछ ना सभी खुश रहे, अच्छे रहें। तो इन्हीं दुआओं के साथ कहानी में आज इतना ही।

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